रूबरू | Part 21 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships
तुमने क्या सोचकर उन हीरों को हाथ लगाया था?
अब सज़ा के लिए तैयार हो जाओ मिस मायरा...
ताबिश सरफराज़ तुमको वह सज़ा देगा जिसके बारे में तुम सोच भी नहीं सकती।
ताबिश की बात पर वह अंदर तक कांप गई।
हमारी इजाज़त के बिना कोई किसी चीज़ को हाथ नहीं लगा सकता। और तुम्हारी यह हिम्मत कि तुमने न सिर्फ उन ज्वैलरी को छुआ बल्कि बहुत बारीकी से देखा भी।
ज़रा सोचो अगर वह ज्वैलरी असली होती, तो अब तक तुम उन्हें चुरा चुकी होती, ताबिश उसके बहुत करीब आ गया। इतना करीब कि दोनों को एक-दूसरे की सांसें तक साफ महसूस हो रही थीं।
आप मुझे गलत समझ रहे हैं। मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। और वैसे भी मैं यह जॉब छोड़ रही हूं। वह गुस्से से बोली। उसने अपने अंदर के डर पर काबू पा लिया था।
ओह...जॉब छोड़ रही हैं...
मिल गया जो लेने आई थी? ताबिश व्यंग्य से मुस्कुराया।
मैं अपनी सफाई में कुछ कहना नहीं चाहती। आपको जो समझना है समझें।
सफाई कौन मांग रहा है तुमसे...
तुम्हें तो यहां सज़ा सुनाने के लिए बुलाया है। और तुम्हारी सज़ा यह है कि कल से तुम मेरे साथ ब्लैक स्टोन के लिए काम करोगी।
कल से तुम दादी की नौकर नहीं बल्कि मेरी नौकर हो...
उसके शब्द मायरा की इज़्ज़त पर सीधा वार कर गए।
और मायरा जहां थी वहीं जम गई। मैं आपको जितना बुरा समझती थी आप उससे भी बुरे हैं।
मायरा की नफरत साफ ज़ाहिर हो रही थी।
तुम मुझे क्या समझती हो उससे मुझे कोई मतलब नहीं।
मायरा की नाराज़गी देखकर ताबिश को अजीब सा सुकून मिल रहा था।
मैं यहां दादी की केयरटेकर की हैसियत से आई थी। और अब मैं वह भी छोड़ कर जा रही हूं।
मैं आपके किसी भी फैसले को नहीं मानती। वह वापस जाने के लिए मुड़ी।
तुम हमारी हर बात मानने के लिए पाबंद हो। तुम शायद एग्रीमेंट पेपर को भूल रही हो। ताबिश ने आखिरी पत्ता फेंका।
उसके उठते कदम ठहरे। लेकिन डर से नहीं बल्कि अपने यकीन की वजहद से।
आपको जो करना है कर लें...अब मैं यहां एक पल भी नहीं रूकूंगी।
अगर तुमने ब्लैक हाउस से बाहर कदम निकाला तो हीरों की चोरी के इल्ज़ाम में सीधे जेल ही जाओगी। ताबिश बेरहमी से बोला।
लेकिन मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है। मैंने तो उलटा आपका नुकसान होने से बचाया है। उसकी आंखें नम हो गईं।
मुझे जो कहना था मैंने कह दिया आगे तुम्हारी मर्ज़ी...कहते ही ताबिश बाहर निकल गया। और वह वहीं रखे सोफे पर बैठ गई।
भलाई करने का क्या खूबसूरत इनाम मिला है।
देखा आकिल...
पत्थर बेचते-बेचते इनका दिल भी पत्थर का हो गया है। तुमने जब इनके लिए अपनी जान गंवा दी और इन पर कोई असर नहीं हुआ।
तो फिर मेरी क्या औकात...
मैंने तो इनके कुछ पैसे ही बचाए हैं।
मायरा उठकर अपने कमरे में चली गई। कमरे में जाकर मां से बात की। बहुत जल्द घर वापस आने का वादा करके उसने फोन रख दिया।
मां से बात करने के बाद उसके दिल को कुछ सुकून मिलता है।
वह बिस्तर पर लेट जाती है। लेटते ही उसके कानों में ताबिश के अल्फाज़ गूंजने लगते हैं।
उसकी आंखों में आंसू आ गए, जिन्हें उसने बहने दिया।
लेटे-लेटे कब उसकी आंख लग जाती है उसे पता ही नहीं चलता।
कुछ देर की नींद के बाद उसका मन थोड़ा फ्रेश हो गया था, लेकिन बाहर जाने का उसे बिल्कुल भी मन नहीं हो रहा था।
वह दादी के सामने भी नहीं जाना चाहती थी। वह नहीं चाहती थी कि उसे दुखी देखकर दादी परेशान हों।
वह दोबारा लेट गई। और अगले दिन के बारे में सोचने लगी।
कल उसे क्या फैसला लेना है, यही सोचते-सोचते उसकी आंखें फिर से बन्द होने लगीं।
...
उसने तुम्हारी मदद की। और तुमने इनाम के बदले उसे सज़ा सुना दी। दादी दुखी होकर बोलीं।
ताबिश कोई जवाब देने के बजाए खामोशी से दादी को देखता रहा।
पहले दिन से तुम उससे गुस्सा हो।
तुम कोई मौका नहीं छोड़ते उसे बेइज़्ज़त करने का लेकिन वह हमेशा खामोश रही।
तुम उसके साथ ऐसा रवैया क्यों रखते हो? दादी नाराज़गी से उसे देख रहीं थीं। ताबिश के आज के रवैए से वह बहुत दुखी हुई थीं।
फिर मैं क्या करता दादी?... ताबिश बेबस होकर बोला।
उसकी शक्ल देखकर दादी हैरान रह गईं। क्योंकि उसकी आंखों की उदासी दादी से छुपी न रह सकी।
उसने तुम्हारी मदद की। तुम्हें उसका शुक्रिया अदा करना चाहिए था।
मायरा ने हमारा करोड़ों का नुक़सान होने से बचाया है। तुमने कहा था वह यहां पर किसी मकसद से आई है। अगर उसका मकसद हमें बर्बाद करना होता तो वह कभी इस तरह उन हीरों की सच्चाई तुमको न बताती।
दादी ने उसे समझाने की कोशिश की।
उसने उन हीरों को हाथ क्यों लगाया? आज से पहले क्या कभी किसी स्टाफ ने ऐसा किया था?
वह हमारे लिए फरिश्ता बनकर आई। और हमारा नुकसान होने से बचा लिया... तुम ऐसा भी तो सोच सकते थे।
दादी उसे उसकी गलती का एहसास करा रही थी। जिसे वह मानने के लिए तैयार नहीं था।
वह यह जॉब छोड़ कर जा रही थी... इसलिए मैंने उसे सज़ा सुना दी।
दिल की बात अनजाने में उसकी ज़ुबान पर आ गई।
उसकी बात पर दादी हैरानी से उसे देखती है। उनका दिल खुशी से भर गया। लेकिन उन्होंने अपनी खुशी ज़ाहिर नहीं होने दी।
तुम उसे क्यों रोकना चाहते हो? दादी किसी अच्छे जवाब की उम्मीद से ताबिश की ओर देखती हैं।
ताकि मैं पता लगा सकूं कि वह किस मकसद से यहां आई थी।
ताबिश के जवाब से दादी को निराशा ही हाथ लगी।
तो वह कल से तुम्हारे साथ रहेगी?
जी, रोज़ तो काम नहीं होगा। जब होगा तो वह मेरे साथ रहेगी। बाकी वक्त वह आपके साथ रहेगी।
ठीक है...
लेकिन मायरा को परेशान मत करना। दादी को मायरा की फिक्र हुई।
क्या हुआ? बहुत प्यार आ रहा है उस पर... ताबिश मुस्कुरा दिया।
वह है ही इतनी प्यारी...तुम तो यूं ही उसे परेशान करते रहते हो। दादी भी हंस पड़ी।
प्यारी...नौकर होकर मुझसे बराबर से सवाल-जवाब करती है। ताबिश के सामने मायरा का चेहरा आ गया।
बुरी बात...आज के बाद तुम उसके बारे में ऐसा नहीं बोलोगे। ताबिश का उसे नौकर बोलना दादी को बुरा लगा।
सॉरी दादी...आपसे तो नहीं, लेकिन उससे ज़रूर बोलूंगा।
दादी उसे घूर कर देखने लगीं, लेकिन ताबिश के चेहरे पर मुस्कान बनी रही।
ताबिश की आंखों के सामने शाम वाला मंज़र घूम गया। जिस तरह उसके नौकर कहने पर उसका चेहरा अचानक बुझ गया था, वह मंज़र उसे अब भी साफ याद था।
अब आप आरम करें ज़्यादा कुछ सोचें नहीं।
वह उठ खड़ा हुआ और कहते ही बाहर निकल गया। अचानक से उसका मन उदास हो गया था। वह समझ नहीं पा रहा था कि उसके दिल में यह अजीब सी बेचैनी क्यों है।
मायरा का उदास चेहरा क्यों उसे परेशान कर रहा है। अपनी उलझनों में उलझा वह लिफ्ट की ओर बढ़ गया।
कल का दिन तुम्हारी ज़िंदगी का सबसे बुरा दिन होगा मिस मायरा...
अपनी उलझनों को किनारे कर उसका मन एक बार फिर मायरा को सबक सिखाने की ठान चुका था।
जारी है...
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